08 January 2026

मेनोपॉज से जूझती महिलाओं के लिए योग हैं वरदान

Posted By NS  04 Jan 26 11:34 PM357

मेनोपॉज से जूझती महिलाओं के लिए योग हैं वरदान

स्त्री जीवन में रजोनिवृत्ति अथवा मेनोपॉज एक अनिवार्य जैविक संक्रमण काल है, जिसमें प्रजनन क्षमता का क्रमिक अवसान होता है। यह अवस्था केवल शारीरिक परिवर्तन तक सीमित नहीं रहती, अपितु हार्मोनल असंतुलन के कारण मानसिक, भावनात्मक एवं मनोदैहिक स्तर पर भी गहन प्रभाव उत्पन्न करती है। एस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोनों की कमी के परिणामस्वरूप हॉट फ्लैशेज़, अनिद्रा, अस्थिक्षय, हृदय-संवहनी विकार, अवसाद, चिड़चिड़ापन एवं स्मृति दुर्बलता जैसे लक्षण प्रकट हो सकते हैं। भारतीय योगदर्शन में योग को देह, प्राण, मन एवं आत्मा के समन्वय का विज्ञान माना गया है। अतः मेनोपॉज काल में योगासन, प्राणायाम एवं ध्यान, महिलाओं को शारीरिक स्थैर्य, मानसिक शांति एवं हार्मोनल संतुलन प्रदान करने में सहायक सिद्ध होते हैं।

मेनोपॉज की शारीरिक एवं मानसिक चुनौतियाँ

रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज ) (Endocrine System) में व्यापक परिवर्तन होते हैं। हाइपोथैलेमस एवं पिट्यूटरी ग्रंथि की कार्यप्रणाली प्रभावित होने से हार्मोन स्राव में अनियमितता उत्पन्न होती है। इसके फलस्वरूप:, उष्णता तरंगें (Hot Flashes),रात्रि में अत्यधिक पसीना,अनिद्रा,अस्थि घनत्व में कमी (Osteoporosis).स्नायु दुर्बलता एवं जोड़ों में वेदना.मानसिक अस्थिरता, चिंता एवं अवसाद.आत्मविश्वास में कमी देखने को मिलती हैं।

योग-साइलैंट बीमारी में कैसे करेगा वर्क

योग इन सभी समस्याओं को समग्र रूप से संबोधित करता है क्योंकि यह केवल लक्षणों को नहीं, अपितु उनके मूल कारण,प्राणिक एवं मानसिक असंतुलन,को संतुलित करता है।

योग का दार्शनिक दृष्टिकोण

पतंजलि योगसूत्र के अनुसार योगः चित्तवृत्ति निरोधः। मेनोपॉज काल में चित्तवृत्तियाँ अत्यधिक चंचल हो जाती हैं। योगासन शरीर को स्थिरता प्रदान करते हैं, प्राणायाम प्राणशक्ति को संतुलित करता है तथा ध्यान मन को शांति प्रदान करता है। त्रिविध साधनाआसन, प्राणायाम एवं ध्यानमहिलाओं को इस संक्रमण काल में आत्मबोध एवं आत्मबल प्रदान करती है।

मेनोपॉज में डेली करने वाले मुख्य योगासन

1. बद्ध कोणासन

यह आसन श्रोणि प्रदेश को सक्रिय करता है एवं अंडाशय तथा गर्भाशय के रक्तसंचार को संतुलित करता है। इससे हार्मोनल असंतुलन में कमी आती है तथा मानसिक तनाव का शमन होता है। नियमित अभ्यास से मूत्रजनन तंत्र सुदृढ़ होता है।

2. सुप्त बद्ध कोणासन

यह आसन विशेष रूप से विश्रामकारी है। यह पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को सक्रिय कर अनिद्रा, चिंता एवं हॉट फ्लैशेज़ में अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।

3. विपरीत करनी मुद्रा

इस मुद्रा से अंतःस्रावी ग्रंथियों को पोषण प्राप्त होता है। यह रक्तसंचार को मस्तिष्क की ओर प्रवाहित कर मानसिक थकान, स्मृति दुर्बलता एवं अवसाद को कम करती है।

4. भुजंगासन

यह मेरुदंड को लचीला बनाता है तथा अधिवृक्क (Adrenal) ग्रंथियों को सक्रिय कर तनाव हार्मोन के संतुलन में सहायक होता है। इससे आत्मविश्वास एवं ऊर्जा का संचार होता है।

5. सेतुबंधासन

यह आसन थायरॉयड एवं पिट्यूटरी ग्रंथि को प्रभावित करता है, जिससे हार्मोनल संतुलन में सहायता मिलती है। साथ ही यह पीठ एवं कमर के दर्द में राहत प्रदान करता है।

6. शवासन

शवासन योग का सर्वाधिक सूक्ष्म किन्तु प्रभावशाली आसन है। यह मनोदैहिक तनाव को पूर्णतः शिथिल कर गहन विश्राम प्रदान करता ह

मेनोपॉज में प्रभावी प्राणायाम 

अनुलोम-विलोम

यह प्राणायाम नाड़ीशोधन कर प्राणिक संतुलन स्थापित करता है। इससे मानसिक शांति एवं हार्मोनल स्थिरता प्राप्त होती है।

भ्रामरी प्राणायाम

भ्रामरी से उत्पन्न नाद मस्तिष्क में शांति उत्पन्न करता है। यह अवसाद, चिड़चिड़ापन एवं अनिद्रा में विशेष रूप से लाभकारी है।

शीतली एवं शीतकारी प्राणायाम

ये प्राणायाम शरीर की उष्णता को शांत कर हॉट फ्लैशेज़ एवं रात्रि पसीने में राहत प्रदान करते हैं।

ध्यान एवं योगनिद्रा

मेनोपॉज काल में ध्यान एवं योगनिद्रा स्त्री को आत्मस्वीकृति एवं आंतरिक शांति प्रदान करते हैं। नियमित ध्यान अभ्यास से सेरोटोनिन एवं मेलाटोनिन हार्मोन का स्राव संतुलित होता है, जिससे मनःस्थिति स्थिर रहती है।

आहार एवं जीवनशैली के योगिक सिद्धांत

योग केवल आसनों तक सीमित नहीं है। सात्त्विक, सुपाच्य एवं पौष्टिक आहार, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त विश्राम एवं सकारात्मक चिंतन योगिक जीवनशैली के अभिन्न अंग हैं। मेनोपॉज काल में कैफीन, अत्यधिक तैलीय एवं प्रसंस्कृत आहार से परहेज करना हितकर होता है।

सार 

महिलाओं के लिए मेनोपॉज कोई रोग नहीं, बल्कि आत्मपरिवर्तन का काल है। योग इस काल को पीड़ा का नहीं, बल्कि आत्मविकास का अवसर बना देता है। नियमित योगाभ्यास से स्त्री न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ रहती है, अपितु मानसिक रूप से सशक्त, संतुलित एवं आत्मविश्वासी बनती है। अतः मेनोपॉज काल में योग को जीवन का अभिन्न अंग बनाना स्त्री स्वास्थ्य के लिए एक दिव्य वरदान है।

अस्वीकरण (Disclaimer)

इस वेबसाइट पर प्रस्तुत लेख में दी गई समस्त जानकारी केवल सामान्य शैक्षिक एंव जागरुकता के उद्देश्य से प्रदान की गई है। मेनोपॉज की अवस्था में प्रत्येक महिला की शारीरिक संरचना, हार्मोनल स्थिति एवं स्वास्थ्य-दशा भिन्न हो सकती है। अतः यहाँ वर्णित योगासन, प्राणायाम अथवा जीवनशैली संबंधी सुझावों को अपनाने से पूर्व किसी योग विशेषज्ञ,आयुर्वेदाचार्य अथवा पंजीकृत चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें, विशेषकर यदि आप किसी दीर्घकालिक रोग, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, अस्थिक्षय या हार्मोनल विकार से पीड़ित हों। इस लेख में दी गई जानकारी के आधार पर किए गए किसी भी अभ्यास से उत्पन्न संभावित लाभ अथवा हानि के लिए वेबसाइट, लेखक अथवा प्रकाशक किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी निर्वाह नहीं करेंगे। 

By:- Neeti Singh

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